Tuesday, July 8, 2008


ज़िंदगी के तमाम पहलुओं को बारीकी से परखा है। खट्टे-मीठे अहसासों के बीच कहीं ना कहीं कुछ अहसास ऐसे भी हैं जो आज तक चुभ रहे हैं, पुरानी यादों का एक गुबार है जो बताता है कि कभी पहुँच की गिरफ़्त से कुछ लम्हे छिटक गये थे ।
वक़्त बदला , कुछ हम भी बदले। ज़िंदगी की भागदौड़ भी कुछ थमी। आज रुतबा है, शोहरत है, तमाम चीजों को हासिल करने की हैसियत है। ढेर सारे साथी भी हैं जो हर पल के लिये हमारे साथ हैं। फ़ुर्सत के पल बहुत कम हैं लेकिन जब तन्हाई कभी आयी तो बस याद आ गये वही धुँधले से पल। हम सिर्फ़ यही कह पाये, "काश ....... !!!"
दिल को जब भी टटोला तो पाया कि चुभन आज भी बाकी है॥