Tuesday, October 26, 2010

आज सूरज को आँगन में छुपा दो


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आज सूरज को आँगन में छुपा दो
और घर जब रौशनी से भर जाए
तो उलीच देना कतरा -कतरा
बिखरे तो बिखरे, बहे सो बहे !
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कटोरे भर रौशनी मुनिया को
और संदूक भर खुल्ली काका को
बाकी जो बचे वो जुम्मन को
इनकी बस्ती में सूरज आया ही कब?
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जब गुनगुना हो जाए सूरज
तो काजल में पार लेना
बच्चों को चुपके से बुलाकर
उनके आँखों में ढाल देना
इनकी आँखों में सूरज फबता है !
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रात स्याह -सर्द हो जाय तो
कम्बल उढ़ा के विदा कर देना
लालटेन से रास्ता भी बता देना
कहना, घर पहुँच के मिस कॉल करे
सुबह टाइम पर आये, चुपके से आँगन में छुप जाए

Oct 26, 2010

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