Monday, November 9, 2009

मै लिख पाता हूं कविता जब .. ....

मै लिख पाता हूं कविता जब तुम मन को उकसाते हो ॥

दूर कहीं जब पथ पर अपने,
संघर्ष स्वरों मै मै गाता हूं
तब मेरी बोझिल आँखो को तुम लक्ष्य नया दिखलाते हो॥

शिथिल हो गया जब मन का कवि,
और मैने कविता को मृत माना
तब मरे हुए शब्दों को तुम ही अमृतपान कराते हो ॥

अपनी ही कवितायें गिनकर
ठान ही लूं मै इतिश्री करना
तब मेरे संग्रह की माला मे एक नयी मणि तुम लाते हो॥

जब धरती के सब रंग उजड़ गये
प्रकृति जर हुई विकृत होकर
तब मेरे सपनों की दुनिया मे कई रंग तुम भर जाते हो ॥
मै लिख पाता हूं कविता जब तुम मन को उकसाते हो ॥
-- -- .॥
© सारथ व्यास॥11/03/2002॥

No comments: